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सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती- 2017 के अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी की रिपोर्ट
Uploaded on: 2017-11-01

      सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती- राष्ट्रीय एकता दिवस- 2017 के अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी की रिपोर्ट                                                                                         

31 अक्टूबर, 2017

स्वतंत्र भारत के भौगोलिक तथा राजनैतिक स्वरूप को वर्तमान आकार देने वाले नेतृत्व के अग्रणी तथा अपनी दूरदृष्टि व दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण लौहपुरुष व भारत के बिस्मार्क के नाम से सुविख्यात भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री व गृहमंत्री, सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती- राष्ट्रीय एकता दिवस- के अवसर पर सरदार साहब के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करने तथा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को उनके जीवन दर्शन से अवगत कराने हेतु केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के अतिश सभागार में दिनांक 31 अक्टूबर 2017 को एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के इतिहास विभाग के प्रो. राकेश पाण्डेय जी ने सरदार साहब के व्यक्तित्व व कृतित्व पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि सरदार पटेल का यह दृढ़ मत था कि  जो देश अपने अन्तिम व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होगा उसे विश्व की कोई शक्ति पराजित नहीं कर सकती। राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी और सरदार पटेल सहित तमाम तत्कालीन नेताओं की यह दृष्टि 1931 में आयोजित कांग्रेस के कराची अधिवेशन के प्रस्ताव तथा आजादी के बाद बने भारत के संविधान में स्पष्ट रुप से परिलक्षित होती है। 1950 के प्रारम्भ में सरदार पटेल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि थे उस समय उन्होंने अपना उद्बोधन देते हुए कहा था कि सैकड़ों वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं से हमारी हार का प्रमुख कारण हमारी जातीय, भाषायी तथा क्षेत्रीय संकीर्णता ही रही है। प्रो. राकेश पाण्डेय जी ने कहा कि सरदार पटेल ने देश की इस कमजोरी पर बार बार प्रहार किया जिसके फलस्वरुप समानता को मौलिक अधिकार का दर्जा प्राप्त हुआ। सरदार पटेल का दृढ़इच्छा शक्ति और कुशल नेतृत्व के कारण ही आजादी के बाद 565 देशी रियासतों का देश में विलय कर एक शक्तिशाली और सम्प्रभु राष्ट्र की स्थापना सम्भव हुयी।    

विश्वविद्यालय की परम्परानुसार संगोष्ठी का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन, मंगलाचरण तथा सरदार वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। मंचासीन विद्वानों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. उमेश चन्द्र सिंह ने कहा कि सरदार पटेल को सरदार की उपाधि उनके सूखाग्रस्त किसानों की करमाफी हेतु किए गए आन्दोलन के नेतृत्व के कारण बारदोली की किसान महिलाओं ने दिया था।

प्रो. बाबूराम त्रिपाठी जी ने सरदार पटेल विषयक विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरदार साहब कुशल राजनेता, संगठनकर्ता तथा प्रभावशाली वक्ता थे।          

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ रणशील उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि सादगी, कर्मठता और दृढ़निश्चय की मिसाल सरदार पटेल जैसे नेतृत्व के कारण ही हमारा देश आज एक सम्प्रभु राष्ट्र है।

 संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के समस्त अध्यापक, कर्मचारी, छात्र-छात्राओं सहित आमंत्रित गणमान्य विद्वान उपस्थित रहे।        

 

 

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